संत कबीरदास की सीख
Kabir की सीखें आज भी जीवन को सरल, सच्चा और संतुलित बनाने की प्रेरणा देती हैं। उनकी वाणी दोहों के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ कुछ प्रमुख सीखें हिंदी में दी गई हैं:
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Kabir की सीखें आज भी जीवन को सरल, सच्चा और संतुलित बनाने की प्रेरणा देती हैं। उनकी वाणी दोहों के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ कुछ प्रमुख सीखें हिंदी में दी गई हैं:
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“साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।”
कबीरदास जी कहते हैं कि सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं और झूठ सबसे बड़ा पाप है।
“काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।”
काम को टालना नहीं चाहिए। समय बहुत मूल्यवान है।
“जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं।”
अहंकार मनुष्य को भगवान और सच्चाई से दूर कर देता है।
“संगत कीजे साधु की, कभी न निष्फल होय।”
अच्छे लोगों की संगति जीवन को बेहतर बनाती है।
“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।”
सच्चा ज्ञान प्रेम और मानवता में है।
“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।”
दूसरों की गलतियाँ देखने से पहले स्वयं को सुधारना चाहिए।
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कबीरदास जी दिखावे और आडंबर के विरोधी थे। वे सादा जीवन और उच्च विचारों पर जोर देते थे।
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