brihaspativar ki kahani

 


बृहस्पतिवार व्रत की कथा

बहुत समय पहले की बात है, एक नगर में सत्यवान नामक ब्राह्मण अपने परिवार के साथ रहता था। सत्यवान अत्यंत धर्मात्मा और ईमानदार व्यक्ति था। वह हमेशा गुरु और ब्राह्मणों की सेवा करता और सत्य का पालन करता।

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एक दिन सत्यवान की पत्नी सुंदरी ने बृहस्पतिवार का व्रत रखने का निश्चय किया। उसने अपने पति को बताया कि इस व्रत से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। सत्यवान ने उसकी बात मानी और उसने व्रत में उसे पूरा सहयोग दिया।

सुंदरी ने बृहस्पतिवार के दिन भगवान बृहस्पति की पूजा की, पीले वस्त्र पहनकर धूप, दीप और सुप्रसिद्ध फल चढ़ाए। उसने गुरु की सेवा की और दिनभर उपवास रखा।

भगवान बृहस्पति इस व्रत से प्रसन्न हुए और सुंदरी के पति सत्यवान की सभी परेशानियों को दूर कर दिया। उसका घर खुशियों और समृद्धि से भर गया।

कहते हैं, जो भी व्यक्ति बृहस्पतिवार को व्रत करता है और गुरु एवं भगवान बृहस्पति की पूजा करता है, उसे धन, बुद्धि, धर्म और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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