ekadashi vrat katha

 


एकादशी व्रत कथा

बहुत समय पहले की बात है। द्वापर युग में राजा प्रतापभानु नाम का एक राजा राज्य करता था। वह धर्मप्रिय और बहुत दानी राजा था। परंतु वह भौतिक सुखों में इतना मग्न था कि उसने अपने प्रजा की भलाई का ध्यान कम ही रखा।

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एक दिन राजा ने देखा कि उसका राज्य सुख-समृद्धि से भरा हुआ है, परन्तु उसके मन को शांति नहीं मिल रही। उसने अपने प्रज्वलित गुरु से परामर्श लिया। गुरुजी ने कहा, "हे महाराज! असली सुख और शांति व्रत और उपवास से प्राप्त होती है। विशेषकर एकादशी व्रत का पालन करने से परमात्मा की कृपा मिलती है और सभी पाप नष्ट होते हैं।"

राजा ने गुरुजी की बात मानी और एकादशी व्रत रखने का संकल्प लिया। वह दिन-रात भक्ति में लीन रहा और अपने प्रजा के लिए धर्म कार्य करता रहा।

कुछ वर्षों बाद, राजा के राज्य में अपार सुख और समृद्धि हुई। उसके घर में सुख-शांति बनी और राजा के सभी कष्ट दूर हो गए। उसकी भक्ति देखकर सभी लोग एकादशी व्रत करने लगे।

एकादशी व्रत का महत्व:

  1. यह व्रत विष्णु भगवान को बहुत प्रिय है।

  2. इस व्रत से पाप नष्ट होते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  3. व्रत के दिन अनाहार रहना चाहिए या केवल फलाहार करना चाहिए।

  4. एकादशी व्रत पूरे मन से रखने वाला व्यक्ति धन, मान, और सुख-शांति प्राप्त करता है।

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