ganesh ji story
गणेश जी और उनकी बुद्धि की कहानी
एक समय की बात है, माता पार्वती ने अपने हाथों से मिट्टी से एक सुंदर बच्चा बनाया और उसे जीवनदान दिया। उन्होंने उसे आदेश दिया कि कोई भी बिना उनके कहे घर में प्रवेश न करे। तभी भगवान शिव घर लौटे। गणेश जी ने अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्हें रोक दिया।
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शिव जी ने बहुत समझाने की कोशिश की, पर गणेश जी ने किसी की नहीं सुनी। क्रोधित होकर शिव जी ने युद्ध किया और गणेश जी का सिर काट दिया। माता पार्वती बहुत दुखी हुईं। उन्हें अपने पुत्र की मृत्यु से बड़ा दुःख हुआ। शिव जी ने उन्हें दुखी न करने का प्रण लिया और नए सिर की खोज में निकले।
शिव जी ने सबसे पहले जानवरों का सिर देखा, और सबसे अंत में एक हाथी का सिर पाया। उन्होंने उस हाथी के सिर को गणेश जी के शरीर पर लगाकर उन्हें जीवन दिया। इस प्रकार गणेश जी को हाथी का सिर मिला और वे बुद्धि, विद्या और बाधाओं को दूर करने वाले देवता बन गए।
सीख:
यह कहानी हमें सिखाती है कि बुद्धि, सम्मान और माता-पिता की आज्ञा का पालन करना बहुत महत्वपूर्ण है। गणेश जी का हाथी का सिर यह भी दर्शाता है कि कभी-कभी सबसे असामान्य परिस्थितियाँ भी जीवन में बड़े लाभ और ज्ञान ला सकती हैं।
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