guruvar vrat katha


गुरुवार का व्रत भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति जी को समर्पित होता है। यह व्रत खासकर महिलाओं द्वारा परिवार में सुख, समृद्धि और संतान सुख के लिए किया जाता है। यहाँ गुरुवार व्रत की कथा सरल भाषा में प्रस्तुत है:

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गुरुवार व्रत कथा

बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में एक निर्धन ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी बहुत ही भक्तिमान और सत्कर्मी महिला थी। वह अपनी दिनचर्या में भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति जी की पूजा में विश्वास रखती थी।

एक दिन ब्राह्मण के घर में अत्यधिक गरीबी छा गई। उनके पास खाने के लिए अनाज भी नहीं बचा। ब्राह्मण और उसकी पत्नी दुखी होकर भगवान से प्रार्थना करने लगे। पत्नी ने भगवान से कहा, “हे देव, यदि आप हमें सुख और समृद्धि देना चाहते हैं तो मैं आपका व्रत करूंगी।”

उसने गुरुवार का व्रत करने का निश्चय किया। वह व्रत के दिन निर्जल उपवास रखती, गुरुवार को पीले वस्त्र पहनकर, पीली सामग्री जैसे हल्दी, चावल, मूंग और घी से भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति जी की पूजा करती।

कुछ समय बाद भगवान विष्णु और बृहस्पति जी उसकी भक्ति से प्रसन्न हुए। उन्होंने ब्राह्मण दंपति की कठिनाइयाँ दूर कर दीं और उनके घर में सुख, समृद्धि और संतान की प्राप्ति हुई।

इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची भक्ति और नियमपूर्वक व्रत करने से मनुष्य के जीवन में सुख और समृद्धि आती है।


गुरुवार व्रत करने का नियम

  1. व्रत के दिन पीला रंग पहनें।

  2. भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति जी की पूजा करें।

  3. विधिपूर्वक दीपक जलाएं और चावल, हल्दी, घी से प्रसाद बनाएं।

  4. संतान सुख, धन और परिवार की भलाई के लिए व्रत करें।

  5. व्रत का दिन शुक्रवार या अन्य दिनों से भिन्न रूप से मनाएं।

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