motivational story of monk
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एक प्रेरणादायक भिक्षु (Monk) की कहानी
एक बार एक पर्वत पर रहने वाले भिक्षु के पास एक युवा व्यक्ति सीखने आया। वह बहुत परेशान था, जीवन में शांति और सफलता चाहता था।
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युवा बोला,
“गुरुजी, मेरे मन में बहुत उलझनें हैं। कभी गुस्सा आता है, कभी डर, कभी दुख। मैं क्या करूँ?”
भिक्षु मुस्कुराया और उसे अपने साथ नदी किनारे ले गया।
नदी में हल्की गंदगी थी। भिक्षु ने कहा,
“इस पानी को पीकर देखो।”
युवक ने कहा,
“गुरुजी, ये तो गंदा है… पी नहीं सकता।”
भिक्षु ने कुछ देर वहीं बैठकर प्रतीक्षा की। पानी धीरे-धीरे शांत होने लगा और गंदगी नीचे बैठ गई। अब पानी बिलकुल साफ था।
भिक्षु ने कहा,
“अब पीकर देखो।”
युवक ने पानी पिया और बोला—“अब यह पानी साफ और मीठा है।”
भिक्षु ने मुस्कुराते हुए कहा:
“मन भी ऐसी ही नदी है। जब तुम परेशान होते हो, गुस्से में होते हो, या डरते हो—तब मन की गंदगी ऊपर आ जाती है।
अगर तुम उसी समय कोई निर्णय लोगे, तो वह गलत होगा।
लेकिन जब तुम अपने मन को शांत होने देते हो, थोड़ी देर रुक जाते हो… तब सब साफ दिखने लगता है।”
कहानी की सीख
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शांत मन से लिया गया निर्णय हमेशा सही होता है।
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भावनाओं के समय कोई बड़ा निर्णय न लें।
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रुकना कमजोरी नहीं, बल्कि बुद्धिमानी है।
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