ravivar vrat katha
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रविवार व्रत कथा
प्राचीन काल में एक गाँव में सुरेश नामक ब्राह्मण रहते थे। वे बहुत ही धर्मपरायण और संत समाज में आदर्श माने जाते थे। लेकिन उनका एक बड़ा दुख था—उनकी कोई संतान नहीं थी।
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एक दिन ब्राह्मणों के संघ में एक वरिष्ठ साधु ने उन्हें सलाह दी,
“संतुलित और श्रद्धापूर्वक रविवार का व्रत रखो। भगवान सूर्य की कृपा से तुम्हारे जीवन में सुख और संतान की प्राप्ति होगी।”
सुरेश ने साधु की बात मानी और नियमित रूप से रविवार व्रत रखने लगे।
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सुबह जल्दी उठकर स्नान और साफ-सफाई करते।
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सूर्यदेव की पूजा में गेरू, लाल फूल और कच्चा दूध अर्पित करते।
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व्रत के दिन तिल और गुड़ से बने व्यंजन ही खाते।
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ध्यान और भजन में समय व्यतीत करते।
कुछ महीनों के बाद ही उनके घर सुख और समृद्धि आई। उनकी पत्नी को संतान की प्राप्ति हुई और गाँव में उनकी मान्यता बढ़ गई।
कहानी की सीख:
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रविवार का व्रत श्रद्धा और विश्वास से रखने से जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
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सूर्यदेव की पूजा से परिवार में सौभाग्य और जीवन में ऊर्जा का प्रवाह होता है।
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