somvar ki kahani
सोमवार व्रत की कहानी
बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में एक विधवा महिला अपने बेटे के साथ रहती थी। वह महिला बहुत ही गरीब थी, लेकिन बहुत धर्मनिष्ठ और सदाचारी थी। उसके जीवन में दुखों का पहाड़ लगा हुआ था, फिर भी वह भगवान शिव की भक्ति में लीन रहती थी।
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महिला हर सोमवार उपवास रखती और भगवान शिव की पूजा करती। वह अपने बेटे को भी सिखाती कि ईमानदारी और भक्ति से बड़ा कोई धन नहीं। गाँव के लोग उसे हमेशा कहते कि इतने कठिन समय में उपवास और पूजा क्या फायदा? लेकिन वह महिला कभी नहीं हारी।
एक दिन गाँव में अकाल पड़ा और अन्न की भारी कमी हुई। गरीब महिला के पास भी कुछ खाने को नहीं बचा। फिर भी उसने भगवान शिव की भक्ति और सोमवार व्रत नहीं छोड़ा। उसने अपने बेटे से कहा, “पुत्र, भगवान की भक्ति से बड़ा कोई सुख नहीं। आज हमारे पास अन्न नहीं है, पर हमारे मन में विश्वास है।”
रात को महिला ने भक्ति में डूबकर भगवान शिव की आराधना की। तभी चमत्कार हुआ – उसके घर के बाहर एक बर्तन में सोने का अन्न भर गया। महिला और उसका बेटा अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने उस अन्न से गाँव के सभी लोगों की सहायता की।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची भक्ति और विश्वास कभी व्यर्थ नहीं जाता। भगवान अपने भक्तों की रक्षा और सहायता हमेशा करते हैं।
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