surya bhagwan ki kahani
सूर्य भगवान की कथा
सूर्य भगवान, जिन्हें “सूर्यदेव” भी कहा जाता है, पूरे ब्रह्मांड में प्रकाश और जीवन देने वाले हैं। वे दिन के स्वामी हैं और उनके बिना जीवन संभव नहीं।
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कथा:
एक समय की बात है, धरती पर अंधकार और रोग फैल गए थे। लोग बीमारियों और अंधकार से परेशान थे। तब सभी देवताओं ने मिलकर भगवान ब्रह्मा से प्रार्थना की कि कोई ऐसा देवता आए जो जीवन में प्रकाश और स्वास्थ्य लेकर आए।
भगवान ब्रह्मा ने सूर्य भगवान को धरती पर भेजा। सूर्यदेव ने अपनी तेजस्वी किरणों से पूरी धरती को रोशन किया। उनके प्रकाश से सभी अंधकार और बुरी शक्तियाँ दूर हुईं। उनके ताप से पृथ्वी की नदियाँ, पेड़-पौधे और जीवन सब समृद्ध हुए।
इसलिए सूर्य को जीवनदाता और स्वास्थ्य के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। हिन्दू धर्म में सूर्य नमस्कार, रवि व्रत, और सूर्य उपासना इसी कारण से की जाती है।
शास्त्रों के अनुसार:
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सूर्य भगवान को 12 राशियों के आधार पर ब्रह्मांड का नियंत्रक माना गया है।
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उन्हें चार हाथों वाला, लाल वस्त्रधारी और आसन पर बैठे हुए दिखाया जाता है।
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उनके सारथी सात घोड़ों वाली गाड़ी खींचते हैं, जो दिन और रात के क्रम को दर्शाती है।
सीख:
सूर्य भगवान हमें सिखाते हैं कि जीवन में उजाला, ऊर्जा और सकारात्मकता हमेशा बनाए रखनी चाहिए। उनके जैसा हम भी दूसरों के जीवन में रोशनी फैलाने का प्रयास करें।
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