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भक्ति का फल – भिखारी और भगवान शिव

एक समय की बात है, एक गरीब भिखारी जंगल के पास रहता था। उसके पास खाने के लिए बहुत कम था, लेकिन उसका हृदय हमेशा भगवान के प्रति भक्ति और श्रद्धा से भरा रहता। वह रोज़ भगवान शिव की पूजा करता और गहरे मन से उन्हें याद करता।

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एक दिन उसे बहुत भूख लगी। पास ही एक बड़ा तालाब था। उसने सोचा, "मैं भगवान शिव के लिए व्रत रख रहा हूँ, शायद वे मेरी मदद करेंगे।" लेकिन उसके पास खाने को कुछ नहीं था।

उसी समय भगवान शिव स्वयं उसके सामने प्रकट हुए। उन्होंने भिखारी से कहा, "तुमने मुझसे जो भक्ति की है, उसके लिए मैं तुम्हारी मदद करूँगा।" भगवान ने अपनी त्रिशूल से तालाब में पानी हिलाया और वहाँ से सोने का एक बड़ा बर्तन उभर आया।

भिखारी ने सोचा, "यह तो भगवान का आशीर्वाद है।" उसने बर्तन को गरीबों में बांट दिया और फिर भी अपने लिए कुछ रखा। उसकी भक्ति और दान करने की भावना देखकर भगवान शिव ने उसे आशीर्वाद दिया कि उसके जीवन में कभी भी कमी न होगी।

सीख:
सच्ची भक्ति और ईश्वर में विश्वास रखने वालों की कभी मदद नहीं टलती। भक्ति केवल पूजा या शब्दों में नहीं, बल्कि ईश्वर के नाम और दूसरों की भलाई में प्रकट होती है।

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