dadi maa ki kahani
दादी माँ की कहानी: “ईमानदार खरगोश”
एक समय की बात है, एक छोटे गाँव में एक प्यारा सा खरगोश रहता था। उसका नाम था चिरू। चिरू बहुत ही चालाक और खुशमिजाज था, लेकिन कभी-कभी वह झूठ बोल कर मुश्किल से बच जाता था।
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एक दिन गाँव के पास जंगल में एक बड़ा उत्सव होने वाला था। सभी जानवर वहाँ आमंत्रित थे। चिरू बहुत खुश था और उसने सोचा, "अगर मैं झूठ बोल कर जल्दी वहाँ पहुँच जाऊँ, तो सबसे पहले खेलों में भाग लूँगा।"
चिरू ने झूठ बोला कि वह बीमार है, इसलिए उसकी माँ ने उसे भेज दिया। लेकिन जंगल में पहुँचते ही उसे पता चला कि उसके झूठ की वजह से दूसरे जानवर दुखी हुए थे।
तभी वहाँ की दादी माँ, जो सभी जानवरों की मदद करती थी, आईं और बोलीं,
“चिरू, ईमानदारी हमेशा सबसे बड़ी ताकत होती है। झूठ से कुछ समय के लिए फायदा हो सकता है, लेकिन सच हमेशा जीतता है।”
चिरू को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने सबके सामने माफी मांगी और सच बोल दिया। दादी माँ ने उसे गले लगाया और कहा,
“देखो, अब तुम खुश हो और सब जानवर तुम्हें प्यार करते हैं। सच बोलना हमेशा अच्छा होता है।”
चिरू ने वादा किया कि अब वह कभी झूठ नहीं बोलेगा और हमेशा ईमानदार रहेगा।
और इस तरह, चिरू और सभी जानवर खुशी-खुशी जंगल में खेलते रहे।
सीख:
ईमानदारी सबसे बड़ी अच्छाई है। झूठ से थोड़ी देर के लिए फायदा हो सकता है, लेकिन सच हमेशा मजबूत और प्यारा होता है।
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