dadi maa ki kahaniya

 दादी माँ की कहानी: सच्चाई का दीपक

एक गाँव में मोहन नाम का एक छोटा लड़का रहता था। वह बहुत गरीब था, लेकिन ईमानदार था। एक दिन उसे रास्ते में एक थैली मिली। थैली में बहुत सारे सोने के सिक्के थे।

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मोहन खुश तो हुआ, लेकिन बोला,
“यह मेरे नहीं हैं, मुझे इसके मालिक को ढूँढना चाहिए।”

वह थैली लेकर गाँव के चौपाल पहुँचा और ज़ोर से बोला,
“यह थैली जिसकी है, वह आकर ले जाए।”

थोड़ी देर बाद एक अमीर सेठ आया और बोला,
“यह मेरी थैली है, लेकिन इसमें 50 सिक्के थे, अब इसमें केवल 40 हैं। तुमने 10 चुरा लिए!”

मोहन डर गया, लेकिन उसने सच कहा,
“सेठ जी, मैंने एक भी सिक्का नहीं लिया।”

गाँव के बुज़ुर्ग ने कहा,
“जिसका दिल सच्चा होता है, भगवान उसकी रक्षा करते हैं।”

उन्होंने सेठ की थैली खोलकर गिनी—
वाकई उसमें 40 ही सिक्के थे।

तब बुज़ुर्ग बोले,
“जिसकी थैली में 50 सिक्के थे, वह यह नहीं हो सकती। यह थैली मोहन को मिलेगी।”

सेठ शर्मिंदा हो गया और माफी माँगी।

सीख:
सच्चाई हमेशा जीतती है और ईमानदारी सबसे बड़ा धन है।

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