ganesh ji ki katha
- Get link
- X
- Other Apps
गणेश जी की कथा
बहुत समय पहले की बात है। माता पार्वती ने स्नान करते समय अपने शरीर के उबटन से एक बालक बनाया और उसमें प्राण फूंक दिए। उस बालक का नाम रखा गया गणेश। माता पार्वती ने उसे द्वार पर पहरा देने को कहा और स्वयं स्नान करने चली गईं।
To read more ganesh ji ki katha visit our channel
उसी समय भगवान शिव वहाँ आए। गणेश जी ने उन्हें रोक दिया। भगवान शिव को यह अच्छा नहीं लगा और उन्होंने क्रोध में आकर गणेश जी का सिर काट दिया। जब माता पार्वती बाहर आईं और यह दृश्य देखा तो वे अत्यंत दुखी हो गईं। उन्होंने सृष्टि नष्ट करने की चेतावनी दी।
भगवान शिव ने माता पार्वती को शांत करने के लिए वचन दिया कि गणेश को फिर से जीवित किया जाएगा। उन्होंने अपने गणों को भेजा और कहा—“जिसका सिर उत्तर दिशा की ओर हो, उसका सिर ले आओ।” गण एक हाथी का सिर लेकर आए। शिव जी ने उस सिर को गणेश के धड़ से जोड़ दिया और उन्हें जीवनदान दिया।
इसके बाद भगवान शिव ने गणेश जी को वरदान दिया कि—
-
सबसे पहले पूजा तुम्हारी होगी
-
तुम विघ्नहर्ता कहलाओगे
-
बुद्धि, विद्या और शुभता के देव बनोगे
तभी से गणेश जी को प्रथम पूज्य माना जाता है।
सीख:
श्रद्धा, आज्ञाकारिता और बुद्धि से हर संकट दूर किया जा सकता है।
Add sankashti chaturthi vrat katha to your daily routine
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment