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बुधवार का व्रत भगवान बुध को समर्पित होता है। इसे करने से बुद्धि, विद्या, व्यापार में सफलता और जीवन की परेशानियाँ कम होती हैं। यहाँ बुधवार व्रत कथा सरल रूप में प्रस्तुत है:
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बुधवार व्रत कथा
बहुत समय पहले की बात है, एक ब्राह्मण थे जिनका नाम विद्याधर था। वे बहुत ही ईमानदार और धार्मिक स्वभाव के थे। उनका व्यवसाय छोटा था, लेकिन वे हमेशा संतोषी रहते थे।
एक दिन, ब्राह्मण ने सुना कि बुधवार को शुद्ध जल और हरी वस्तुएँ अर्पित करके भगवान बुध की पूजा करने से धन, बुद्धि और संतोष मिलता है। उन्होंने निश्चय किया कि वे इस व्रत को करेंगे।
ब्राह्मण ने हर बुधवार सुप्रभात स्नान के बाद हरी वस्तुएँ, हरी सब्जियाँ और हरा कपड़ा भगवान बुध को अर्पित किया। उन्होंने व्रत का पालन कठोरता से किया और किसी भी गलत कार्य से खुद को दूर रखा।
कुछ ही समय बाद, ब्राह्मण के व्यापार में वृद्धि हुई। उनके घर में सुख-शांति और धन की वर्षा होने लगी। ब्राह्मण की बुद्धि बढ़ी और वे अपने गाँव में सभी के लिए मार्गदर्शक बन गए।
तब से लोग मानते हैं कि बुधवार का व्रत करने से बुध ग्रह की कृपा मिलती है और जीवन में सभी बाधाएँ दूर होती हैं।
बुधवार व्रत का नियम और पूजा विधि
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स्नान और साफ-सफाई: सुबह जल्दी स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
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पूजा सामग्री: हरा कपड़ा, हरी सब्जियाँ, तुलसी का पत्ता, कच्चा चना और जल।
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पूजा विधि:
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भगवान बुध की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएँ।
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हरी सब्जियाँ और अन्य सामग्री अर्पित करें।
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बुध मंत्र “ॐ ब्रां बुधाय नमः” का 108 बार जप करें।
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फायदे: बुधवार व्रत से व्यापार में लाभ, बुद्धि में वृद्धि और मानसिक शांति मिलती है।
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