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जादुई पेड़ और इच्छाओं का सच

एक छोटे से गाँव में अरुण नाम का लड़का रहता था। अरुण को हमेशा कुछ नया और अद्भुत करने की इच्छा रहती थी। एक दिन वह जंगल में खेलते-खेलते एक बहुत ही अजीब पेड़ के पास पहुँच गया। पेड़ की शाखाएँ चमकती हुईं थीं और उसके फल सुनहरी रोशनी छोड़ रहे थे।

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जैसे ही अरुण ने पेड़ के एक सुनहरे फल को छुआ, पेड़ से एक मीठी आवाज़ आई:
“अरुण, मैं जादुई पेड़ हूँ। तुम मुझसे तीन इच्छाएँ मांग सकते हो।”

अरुण बहुत खुश हुआ। उसने तुरंत अपनी पहली इच्छा मांगी:
“मैं सबसे तेज़ दौड़ने वाला बनना चाहता हूँ।”
जैसे ही उसने यह कहा, उसे अपने पैरों में हल्की बिजली सी महसूस हुई और वह इतनी तेज़ दौड़ने लगा कि हवा भी पीछे रह गई।

दूसरी इच्छा उसने मांगी:
“मैं दुनिया की सबसे बुद्धिमान किताबें पढ़ सकूँ।”
फिर क्या था, उसकी आँखों के सामने सारी किताबें अपने आप खुल गईं और अरुण सब कुछ सीखने लगा।

लेकिन तीसरी इच्छा के बारे में सोचते समय अरुण को एहसास हुआ कि वह अपनी इच्छाओं में कुछ भूल रहा है। उसने सोचा, “इतनी शक्तियाँ होने के बाद भी, मेरे गाँव के लोग खुश नहीं होंगे अगर मैं सबके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करूँ।”

तो उसने अपनी तीसरी इच्छा मांगी:
“मैं चाहता हूँ कि मेरा गाँव हमेशा खुश और समृद्ध रहे।”

जादुई पेड़ मुस्कुराया और कहने लगा:
“सच्चाई, दया और दूसरों की भलाई ही असली जादू हैं।”

उस दिन के बाद अरुण की शक्तियाँ गाँव की भलाई में लग गईं। वह केवल खुद के लिए नहीं, बल्कि सबके लिए सोचता और काम करता। गाँव वाले भी हमेशा खुश रहने लगे।

और इस तरह अरुण ने जाना कि सबसे बड़ा जादू हमारी अच्छाई और दूसरों की मदद में छिपा होता है।

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