vrat katha
सोमवार व्रत कथा
बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में एक निर्धन ब्राह्मण अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। ब्राह्मण हर सोमवार उपवास रखकर भगवान शिव की पूजा करता और उनका आशीर्वाद माँगता।
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एक दिन ब्राह्मण के गाँव में एक भयंकर अकाल पड़ा। लोग भूखे थे और ब्राह्मण के पास भी खाने को कुछ नहीं था। पर ब्राह्मण ने संकल्प लिया कि वह सोमवार व्रत नहीं तोड़ेगा।
सचमुच, भगवान शिव उसकी भक्ति से प्रसन्न हुए। उन्होंने ब्राह्मण के घर के बाहर एक सोने का खजाना भेज दिया। ब्राह्मण और उसका परिवार खुशहाल जीवन जीने लगे।
भगवान शिव ने यह भी बताया कि:
"जो भी व्यक्ति श्रद्धा और निष्ठा से सोमवार व्रत करता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उसे दुखों से मुक्ति मिलती है।"
सोमवार व्रत के नियम (सारांश)
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सोमवार का व्रत मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है।
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व्रत वाले दिन उपवास रखें और प्रातःकाल बिल्व पत्र, दूध और जल से शिवलिंग पूजा करें।
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रात्रि में शिव मंत्र का जाप करें – जैसे “ॐ नमः शिवाय”।
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इस दिन भोजन केवल फल, दूध या हल्का भोजन किया जा सकता है।
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