vrat katha

 गुरुवार व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक निर्धन ब्राह्मण रहता था। वह बहुत ईमानदार और भगवान विष्णु का भक्त था, लेकिन गरीबी के कारण उसका जीवन कष्टों से भरा था। किसी ने उसे गुरुवार का व्रत करने की सलाह दी।

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ब्राह्मण ने पूरे विधि-विधान से गुरुवार का व्रत रखना शुरू किया। वह हर गुरुवार भगवान विष्णु की पूजा करता, पीले वस्त्र धारण करता और पीले अन्न का दान करता। कुछ समय बाद उसके जीवन में परिवर्तन आने लगा। घर में सुख-शांति बढ़ी और धन-धान्य की प्राप्ति हुई।

उसी नगर में एक धनवान व्यक्ति भी रहता था, लेकिन वह घमंडी था और किसी की सहायता नहीं करता था। उसने ब्राह्मण की उन्नति देखकर ईर्ष्या में आकर गुरुवार का व्रत तो किया, लेकिन मन से नहीं। परिणामस्वरूप उसका धन नष्ट होने लगा।

तब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना की और गुरुवार व्रत को श्रद्धा से करने लगा। भगवान की कृपा से उसका भी जीवन सुखमय हो गया।

शिक्षा:
सच्चे मन, श्रद्धा और विश्वास से किया गया व्रत ही फल देता है।

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