bhakti kahani
भक्ति की शक्ति
एक गाँव में मीरा नाम की एक साधारण महिला रहती थी। वह बहुत गरीब थी, लेकिन उसका हृदय भक्ति से भरा हुआ था। रोज़ सुबह वह उठकर भगवान कृष्ण का नाम लेती और पूरे मन से उनकी पूजा करती।
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मीरा के पास चढ़ाने के लिए न फल थे, न फूल। वह केवल प्रेम से भरा मन और सच्ची श्रद्धा ही अर्पित कर पाती थी। लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे और कहते थे, “ऐसी पूजा से क्या मिलेगा?”
एक दिन गाँव में भयंकर अकाल पड़ा। सभी लोग दुखी थे। मीरा ने भगवान से प्रार्थना की,
“हे प्रभु, यदि मेरी भक्ति सच्ची है, तो सबकी रक्षा कीजिए।”
कुछ ही दिनों में ज़ोरदार बारिश हुई और खेत फिर से हरे-भरे हो गए। गाँव वालों को समझ आया कि सच्ची भक्ति दिखावे की नहीं, दिल की होती है।
उस दिन के बाद सभी ने मीरा का सम्मान किया और भक्ति का सही अर्थ जाना।
शिक्षा:
भगवान भोग नहीं, भाव देखते हैं। सच्चे मन से की गई भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती।
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