budhwar vrat katha
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बुधवार व्रत कथा (सरल हिंदी में)
प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक गरीब लेकिन ईमानदार व्यापारी रहता था। उसके पास धन नहीं था, पर उसका स्वभाव बहुत अच्छा था। वह हर काम सच्चाई और मेहनत से करता था, फिर भी उसे व्यापार में हमेशा नुकसान होता था।
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एक दिन किसी साधु ने उसे बुधवार व्रत रखने की सलाह दी और कहा—
“बुधवार के दिन भगवान गणेश जी और बुध देव की पूजा करो, हरी वस्तुओं का दान करो और सच्चे मन से व्रत रखो।”
व्यापारी ने साधु की बात मान ली। उसने बुधवार को प्रातः स्नान कर हरे वस्त्र पहने, गणेश जी की पूजा की, हरे मूंग का दान किया और दिन भर सत्य व संयम से रहा। उसने यह व्रत लगातार कई बुधवार तक किया।
कुछ समय बाद उसकी किस्मत बदलने लगी। व्यापार में लाभ होने लगा, घर में सुख-शांति आई और उसके सभी कष्ट दूर हो गए। उसे समझ आ गया कि यह सब बुध देव और गणेश जी की कृपा से संभव हुआ है।
तब से वह और उसका परिवार श्रद्धा से बुधवार व्रत करने लगे।
कथा से सीख:
बुधवार व्रत बुद्धि, व्यापार, वाणी और जीवन में सफलता प्रदान करता है। सच्चे मन और श्रद्धा से किया गया व्रत अवश्य फल देता है।
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