dadi maa ki kahani

 दादी माँ की प्यारी कहानी 

एक गाँव में नन्ही सी बच्ची राधा रहती थी। हर रात वह अपनी दादी माँ के पास सोने जाती और कहती—
“दादी माँ, आज कहानी सुनाओ।”

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दादी मुस्कुरातीं और कहतीं—
“बेटा, कहानी नहीं, आज जीवन का सच सुनाती हूँ।”

दादी माँ ने बताया—
एक बार एक गरीब लकड़हारा जंगल में लकड़ी काट रहा था। अचानक उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। वह रोने लगा। तभी नदी से देवी प्रकट हुईं और सोने की कुल्हाड़ी दिखाकर पूछा—

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“क्या यह तुम्हारी है?”
लकड़हारे ने ईमानदारी से कहा—
“नहीं माता, मेरी तो साधारण लोहे की है।”

देवी उसकी सच्चाई से प्रसन्न हुईं और उसे लोहे की कुल्हाड़ी के साथ सोने और चाँदी की कुल्हाड़ी भी दे दी।

दादी माँ ने प्यार से कहा—
“बेटा, सच्चाई और ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है।”

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राधा मुस्कुराई और बोली—
“दादी माँ, मैं भी हमेशा सच्ची रहूँगी।”
दादी ने उसे आशीर्वाद दिया और दोनों मीठी नींद में सो गईं। 

सीख: सच्चाई और ईमानदारी से बड़ा कोई धन नहीं।

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