garbh geeta
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गर्भ गीता हिंदू धर्म में एक अत्यंत प्रेरणादायक और आध्यात्मिक विषय है।
यह कथा बताती है कि गर्भ में स्थित आत्मा भगवान से क्या प्रार्थना करती है और जन्म से पहले मनुष्य का स्वरूप कैसा होता है।
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गर्भ गीता का सार
कहा जाता है कि जब जीव माँ के गर्भ में होता है, तब वह अपने पूर्व जन्मों के कर्मों को स्मरण करता है।
गर्भ में कष्ट सहते हुए वह भगवान से प्रार्थना करता है—
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“हे प्रभु! इस संसार के दुखों से मुझे मुक्त करें।
मैं जन्म लेकर आपकी भक्ति करूँगा, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलूँगा।”
गर्भ में रहते हुए जीव को संसार का वैराग्य, ईश्वर का ज्ञान और आत्मा की शुद्धता का बोध होता है।
लेकिन जैसे ही जन्म होता है, माया के प्रभाव से वह सब भूल जाता है।
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गर्भ गीता से मिलने वाली सीख
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मानव जन्म अत्यंत दुर्लभ और अमूल्य है
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गर्भ में किया गया वचन हमें धर्म और भक्ति की याद दिलाता है
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संसार की माया हमें सत्य से दूर कर देती है
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हमें जन्म के बाद भी भगवान का स्मरण बनाए रखना चाहिए
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