shani dev ki katha

 

🌑 शनि देव की कथा (सरल हिंदी में)

शनि देव सूर्य देव और छाया देवी के पुत्र हैं। वे न्याय के देवता माने जाते हैं। शनि देव मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। अच्छे कर्म करने वालों पर वे कृपा करते हैं और बुरे कर्म करने वालों को दंड देते हैं।


शनि देव और राजा विक्रमादित्य की कथा

प्राचीन समय में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य बहुत पराक्रमी और न्यायप्रिय थे। एक दिन उन्होंने शनि देव की मूर्ति को पैरों के नीचे दिखाया। शनि देव इससे क्रोधित हो गए और बोले—
“राजन, तुम्हें अपने कर्म का फल अवश्य मिलेगा।”

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कुछ समय बाद राजा विक्रमादित्य पर शनि की साढ़ेसाती आरंभ हुई। उनका राजपाट छिन गया, उन्हें जंगलों में भटकना पड़ा और बहुत कष्ट सहने पड़े। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें मेहनत-मजदूरी करनी पड़ी।

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लेकिन राजा ने कभी धैर्य, सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। वर्षों बाद जब शनि की साढ़ेसाती समाप्त हुई, शनि देव ने प्रसन्न होकर राजा को पहले से भी बड़ा राज्य और सम्मान दिया।

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कथा से शिक्षा

  • शनि देव न्याय करते हैं, वे शत्रु नहीं हैं

  • बुरे कर्मों का फल अवश्य मिलता है

  • धैर्य, सत्य और परिश्रम से संकट टल जाते हैं

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