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शनि देव की कथा
शनि देव सूर्य देव और छाया माता के पुत्र हैं। वे न्याय के देवता माने जाते हैं। शनि देव हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। अच्छे कर्म करने वालों पर उनकी कृपा होती है और बुरे कर्म करने वालों को दंड मिलता है।
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एक बार राजा विक्रमादित्य को शनि की साढ़ेसाती लगी। शनि देव के प्रभाव से राजा को बहुत कष्ट झेलने पड़े। राज्य चला गया, अपमान सहना पड़ा और कठिन जीवन व्यतीत करना पड़ा। फिर भी राजा ने सत्य, धैर्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा।
जब साढ़ेसाती समाप्त हुई, शनि देव प्रकट हुए और बोले—
“राजन, तुमने कष्ट में भी अधर्म नहीं किया। यही कारण है कि अब तुम्हें पहले से भी अधिक सम्मान और वैभव मिलेगा।”
शनि देव की कृपा से राजा विक्रमादित्य का राज्य वापस मिला और वे पहले से भी महान बने।
शिक्षा
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शनि देव दंड नहीं, न्याय देते हैं
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बुरे कर्मों का फल कष्ट है
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अच्छे कर्म, धैर्य और सत्य से शनि देव प्रसन्न होते हैं
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