संत कबीरदास की सीख
संत कबीर दास (Sant Kabirdas) की सीख सरल भाषा में जीवन के गहरे सत्य समझाती है। उनकी शिक्षाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। यहाँ उनकी कुछ प्रमुख सीखें हिंदी में दी गई हैं:
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संत कबीर दास (Sant Kabirdas) की सीख सरल भाषा में जीवन के गहरे सत्य समझाती है। उनकी शिक्षाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। यहाँ उनकी कुछ प्रमुख सीखें हिंदी में दी गई हैं:
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कबीरदास जी कहते हैं कि हमेशा सत्य बोलना चाहिए और ईमानदारी से जीवन जीना चाहिए।
दोहा:
“साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप
जाके हृदय साँच है, ताके हृदय आप।”
वे बताते हैं कि भगवान किसी एक जगह या मंदिर में ही नहीं, बल्कि हर जीव और हर स्थान में हैं।
दोहा:
“मोको कहाँ ढूंढे रे बंदे, मैं तो तेरे पास में।”
कबीरदास जी आत्मचिंतन पर जोर देते हैं।
दोहा:
“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।”
उन्होंने गुरु को भगवान से भी ऊपर बताया है क्योंकि गुरु ही हमें सही मार्ग दिखाता है।
दोहा:
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाय
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।”
समय का सही उपयोग करने की सीख देते हैं।
दोहा:
“काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब।”
कबीरदास सादगी और संतोष को सबसे बड़ा धन मानते हैं।
दोहा:
“साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाय
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाए।”
इस चैनल पर कबीरदास की सीख को रोज सुनिए
कबीरदास जी की सीख हमें सच्चाई, सादगी, प्रेम और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाती है। अगर चाहें तो मैं उनके और दोहे या किसी खास विषय (जैसे शिक्षा, प्रेम, भक्ति) पर उनकी शिक्षाएँ भी समझा सकता हूँ।
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