कबीरदास की वाणी
कबीरदास की वाणी (कबीर के दोहे) सरल, गहरी और जीवन की सच्चाइयों को उजागर करने वाली होती है। यहाँ कुछ प्रसिद्ध दोहे हिंदी में दिए गए हैं:
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1.
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥
अर्थ: जब मैंने दूसरों में बुराई खोजी, तो कोई बुरा नहीं मिला। जब अपने अंदर देखा, तो पाया कि सबसे बुरा मैं ही हूँ।
2.
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥
अर्थ: जो काम कल करना है, उसे आज करो, और जो आज करना है, उसे अभी करो—क्योंकि समय किसी का इंतज़ार नहीं करता।
3.
धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय॥
अर्थ: हर चीज़ अपने समय पर होती है, धैर्य रखना जरूरी है।
4.
पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥
अर्थ: केवल किताबें पढ़ने से कोई ज्ञानी नहीं बनता, सच्चा ज्ञान प्रेम में है।
5.
निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय॥
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अर्थ: आलोचक को अपने पास रखना चाहिए, क्योंकि वह बिना किसी साधन के हमारे स्वभाव को सुधार देता है।
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