कबीरदास की कहानी
- Get link
- X
- Other Apps
Kabir भारत के महान संत, कवि और समाज सुधारक थे। वे अपनी सादगी, भक्ति और दोहों के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी वाणी आज भी लोगों को सही रास्ता दिखाती है।
कबीरदास की कहानी
बहुत समय पहले Varanasi में एक गरीब जुलाहा दंपति रहते थे — नीरू और नीमा। एक दिन उन्हें तालाब के किनारे एक छोटा बच्चा मिला। उन्होंने उस बच्चे को अपनाया और उसका नाम कबीर रखा।
कबीर बचपन से ही बहुत बुद्धिमान और धार्मिक स्वभाव के थे। वे भगवान की भक्ति करना चाहते थे, लेकिन उस समय समाज में जाति-पाति का बहुत भेदभाव था। फिर भी कबीर ने सभी लोगों को समान माना।
और कबीरदास की कहानी पढ़ने के लिए हमारे चैनल पर जाए
कहा जाता है कि कबीर Ramananda को अपना गुरु मानते थे। एक दिन वे सीढ़ियों पर लेट गए जहाँ से गुरु जी सुबह स्नान करने जाते थे। अंधेरे में गुरु जी का पैर कबीर पर पड़ गया और उनके मुख से “राम-राम” शब्द निकला। कबीर ने उसी को गुरु मंत्र मान लिया।
कबीरदास ने अपने दोहों के माध्यम से लोगों को सच्चाई, प्रेम और ईश्वर भक्ति का संदेश दिया। वे कहते थे कि भगवान मंदिर या मस्जिद में नहीं, बल्कि हर इंसान के दिल में रहते हैं। उन्होंने अंधविश्वास, पाखंड और ऊँच-नीच का विरोध किया।
उनका एक प्रसिद्ध दोहा है:
“बुरा जो देखन मैं चला,
बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना,
मुझसे बुरा न कोय॥”
इस चैनल पर कबीरदास की वाणी को रोज सुनिए
इस दोहे का अर्थ है कि जब हम दूसरों की बुराई ढूँढते हैं तो कुछ नहीं मिलता, लेकिन जब अपने मन को देखते हैं तो अपनी गलतियाँ समझ में आती हैं।
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment