कबीरदास की कहानी
Kabir भारतीय संत, कवि और समाज सुधारक थे। उनकी कहानियाँ सरल लेकिन गहरी सीख देने वाली होती हैं। यहाँ उनकी एक प्रसिद्ध कहानी दी गई है:
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Kabir भारतीय संत, कवि और समाज सुधारक थे। उनकी कहानियाँ सरल लेकिन गहरी सीख देने वाली होती हैं। यहाँ उनकी एक प्रसिद्ध कहानी दी गई है:
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एक बार एक पंडित अपने ज्ञान पर बहुत घमंड करता था। वह गाँव-गाँव जाकर लोगों को बताता कि उससे बड़ा विद्वान कोई नहीं।
एक दिन उसकी मुलाकात कबीरदास से हुई। पंडित ने पूछा,
“तुमने कितनी किताबें पढ़ी हैं?”
कबीरदास मुस्कुराए और बोले,
“मैंने प्रेम की एक ही पुस्तक पढ़ी है।”
पंडित हँसने लगा और बोला,
“सिर्फ एक पुस्तक? फिर तुम ज्ञानी कैसे हुए?”
तब कबीरदास ने शांत स्वर में कहा:
“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥”
अर्थ: केवल किताबें पढ़ने से कोई सच्चा ज्ञानी नहीं बनता। जो प्रेम और मानवता को समझ लेता है, वही असली विद्वान है।
इस चैनल पर कबीरदास की वाणी को रोज सुनिए
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